एक दिन अपने समक्ष, दो मुच्छड पहलवानों को देख मै डर गया।
वे बोले "हम यमदूत है", मै समझ गया कि मै मर गया।।
उन्होंने कहा "अपना मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाओ,आगे के लिए ज़रूरी है।
मैंने कहा "कहाँ से बनवाऊँ,मेरे घर में सिर्फ माँ बूड़ी है।।
वे बोले "कोई नी, हज़ार की पत्ती दो अभी बनवा देंगे।"
जेब टटोलने पर जब कुछ ना निकला , तो उन्होंने दिखाए ठेंगे।।
और कहा "जब हो जाये तुम्हारा काम तो 'मिस्काल' करना।
मुझे क्या पता था, हज़ार की कमी के लिए , दो हफ्ते धरती पर था सड़ना।।
अगले दो हफ़्तों में, मै जान गया भटकती आत्माओं का राज़।
अरे , उन्हें तो है सिर्फ एक 'डेथ सर्टिफिकेट ' की दरखास्त।।
यमदूतों ने मेरे मृत्यु प्रमाण पत्र की आँखों ही आँखों में 'फोटोकॉपी' कराइ।
और उसे एक कागज़ पे छाप के मेरे हाथों में थमाई।।
ले गए वो मुझे जीवन निरक्षक के पास।
जिसने मुझे मेरे जीवन के आधार पर , दिए दस में से साढ़े सात।।
मुझसे उसने पुछा कि "कारण सहित बताये स्वर्ग जायेंगे या नर्क ?"
मैंने कहा " जाना तो मई पक्का चाहूँगा स्वर्ग, पर इसका अब मै क्या दूँ तर्क।"
उसने मुझे थोड़ी देर प्रतीक्षा करने को कहा।
जैसे ही होगी कोई सीट खली, आपको जायेगा बुलाया।।
तभी मैंने दस में से पाँच लिए व्यक्ति को स्वर्ग जाते देखा।
और अपने यमदूत की तरफ प्रश्नों से भरा चेहरा फेंका।।
यमदूत बोला "तुम्हारा मुख क्यों एक प्रश्न है।
इसके साथ तो आरक्षण है।।"
आखिर मेरे मृत्यु प्रमाण पत्र पर भी स्वर्ग का ठप्पा लगा।
और मै अपने दोनों यमदूतों की बड़ी सी बैल पे स्वर्ग की ओर भगा।।
स्वर्ग की खूबसूरती को मै कैसे बयान करूँ ?
ऐसा लगा 'श्वेत' लोगों के बीच 'श्वेत' धरती पर हूँ।।
वहाँ मुझे, मुझसे पांच माह पूर्व बिछड़ा घनिष्ठ मित्र मिला।
किसी जान पहचान वाले को अपने पास देखकर, मेरा भी चेहरा खिला।।
उसने मुझे कहा "जल्दी से पंक्ति में आ जाओ ,
कहीं कायदे तोड़ते पकडे ना जाओ।।
कायदे तोड़ते पकडे गए तो मिलेगी भयंकर सज़ा। "
मैं बोल "मैंने तो सोचा था स्वर्ग में आता है मज़ा।।"
वो बोला " ये सब झूठ है,मिथ्या है,यहाँ तो सभी क्रूर है।
मत पूछ भाई ,यहाँ तानाशाही भरपूर है।।"
मैंने आश्चर्य में पुछा, "तो ये क्यों कर रहे है नृत्य ?"
वो बोला "ये तो करेंगे ही, क्योंकि ये नहीं है मृत।।
अपने जुगाड़ से इन्होने नकली मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाये है।
रात भर यहाँ मौज करके वापस अपने शारीर में लौट जाये है।।"
उसके चेहरे पे आती एक अद्भुत मुस्कराहट का कारन पूछा।
वो बोला "इसका भी है पहलु दूजा।।
वो देख वो जो वहाँ मुह लटकाए खड़े है।
वो भी इन्ही के बिरादरी के जुगाडू बहुत बड़े है।।
पर इनसे शरीर में पहुंचने में हो गयी थोड़ी सी देर।
और उनका शारीर आग में जलकल हूँ गया ढेर।।
अब ये भी यहीं फंस गए है।
और हमारे साथ सब कुछ सहे है।।"
वह बोला "कभी-कभी सोचता हूँ, काश चुन लिया होता नर्क।
कम से कम ना मिलता ऐसा अनपेक्षित स्वर्ग।।"
मैंने सोचा क्यों आम आदमी गलत चुनाव करता है ?
शायद इसलिए, क्योंकि वो जो भी चुने,रोना उसे ही पड़ता है।।
वे बोले "हम यमदूत है", मै समझ गया कि मै मर गया।।
उन्होंने कहा "अपना मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाओ,आगे के लिए ज़रूरी है।
मैंने कहा "कहाँ से बनवाऊँ,मेरे घर में सिर्फ माँ बूड़ी है।।
वे बोले "कोई नी, हज़ार की पत्ती दो अभी बनवा देंगे।"
जेब टटोलने पर जब कुछ ना निकला , तो उन्होंने दिखाए ठेंगे।।
और कहा "जब हो जाये तुम्हारा काम तो 'मिस्काल' करना।
मुझे क्या पता था, हज़ार की कमी के लिए , दो हफ्ते धरती पर था सड़ना।।
अगले दो हफ़्तों में, मै जान गया भटकती आत्माओं का राज़।
अरे , उन्हें तो है सिर्फ एक 'डेथ सर्टिफिकेट ' की दरखास्त।।
यमदूतों ने मेरे मृत्यु प्रमाण पत्र की आँखों ही आँखों में 'फोटोकॉपी' कराइ।
और उसे एक कागज़ पे छाप के मेरे हाथों में थमाई।।
ले गए वो मुझे जीवन निरक्षक के पास।
जिसने मुझे मेरे जीवन के आधार पर , दिए दस में से साढ़े सात।।
मुझसे उसने पुछा कि "कारण सहित बताये स्वर्ग जायेंगे या नर्क ?"
मैंने कहा " जाना तो मई पक्का चाहूँगा स्वर्ग, पर इसका अब मै क्या दूँ तर्क।"
उसने मुझे थोड़ी देर प्रतीक्षा करने को कहा।
जैसे ही होगी कोई सीट खली, आपको जायेगा बुलाया।।
तभी मैंने दस में से पाँच लिए व्यक्ति को स्वर्ग जाते देखा।
और अपने यमदूत की तरफ प्रश्नों से भरा चेहरा फेंका।।
यमदूत बोला "तुम्हारा मुख क्यों एक प्रश्न है।
इसके साथ तो आरक्षण है।।"
आखिर मेरे मृत्यु प्रमाण पत्र पर भी स्वर्ग का ठप्पा लगा।
और मै अपने दोनों यमदूतों की बड़ी सी बैल पे स्वर्ग की ओर भगा।।
स्वर्ग की खूबसूरती को मै कैसे बयान करूँ ?
ऐसा लगा 'श्वेत' लोगों के बीच 'श्वेत' धरती पर हूँ।।
वहाँ मुझे, मुझसे पांच माह पूर्व बिछड़ा घनिष्ठ मित्र मिला।
किसी जान पहचान वाले को अपने पास देखकर, मेरा भी चेहरा खिला।।
उसने मुझे कहा "जल्दी से पंक्ति में आ जाओ ,
कहीं कायदे तोड़ते पकडे ना जाओ।।
कायदे तोड़ते पकडे गए तो मिलेगी भयंकर सज़ा। "
मैं बोल "मैंने तो सोचा था स्वर्ग में आता है मज़ा।।"
वो बोला " ये सब झूठ है,मिथ्या है,यहाँ तो सभी क्रूर है।
मत पूछ भाई ,यहाँ तानाशाही भरपूर है।।"
मैंने आश्चर्य में पुछा, "तो ये क्यों कर रहे है नृत्य ?"
वो बोला "ये तो करेंगे ही, क्योंकि ये नहीं है मृत।।
अपने जुगाड़ से इन्होने नकली मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाये है।
रात भर यहाँ मौज करके वापस अपने शारीर में लौट जाये है।।"
उसके चेहरे पे आती एक अद्भुत मुस्कराहट का कारन पूछा।
वो बोला "इसका भी है पहलु दूजा।।
वो देख वो जो वहाँ मुह लटकाए खड़े है।
वो भी इन्ही के बिरादरी के जुगाडू बहुत बड़े है।।
पर इनसे शरीर में पहुंचने में हो गयी थोड़ी सी देर।
और उनका शारीर आग में जलकल हूँ गया ढेर।।
अब ये भी यहीं फंस गए है।
और हमारे साथ सब कुछ सहे है।।"
वह बोला "कभी-कभी सोचता हूँ, काश चुन लिया होता नर्क।
कम से कम ना मिलता ऐसा अनपेक्षित स्वर्ग।।"
मैंने सोचा क्यों आम आदमी गलत चुनाव करता है ?
शायद इसलिए, क्योंकि वो जो भी चुने,रोना उसे ही पड़ता है।।
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