मधुप
Monday, July 22, 2013
ताटंक-छंद
ओ मनवा ! रिश्तेदारों से ,दूर रहें तो प्यारे हैं |
साथ गुंथने से दुःख बढ़े ,अपने भी कुप्यारे हैं |
प्यार दुलार सबै नौटंकी ,मेल-मिलाप छलावा है |
ये स्वारथ की सब झांकी है ,या मन का बहलावा है |
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